इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य औरंगजेब की उस "खलनायक" वाली छवि को चुनौती देना है, जो औपनिवेशिक काल के दौरान ब्रिटिश इतिहासकारों द्वारा गढ़ी गई थी। ट्रश्के का तर्क है कि औरंगजेब के कई निर्णय धार्मिक कट्टरता के बजाय राजनीतिक व्यावहारिकता (political pragmatism) से प्रेरित थे।

औरंगजेब के प्रशासन में पिछले किसी भी मुगल सम्राट की तुलना में सबसे अधिक हिंदू मनसबदार और अधिकारी शामिल थे।

जहां औरंगजेब ने कुछ मंदिरों को तोड़ा, वहीं उसने कई मंदिरों को संरक्षण, भूमि दान और वजीफा भी दिया। लेखक के अनुसार, मंदिरों को तोड़ना धार्मिक नफरत से ज्यादा विद्रोहियों को दंडित करने की एक राजनीतिक कार्रवाई थी।

मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच के संघर्ष को भी एक नए ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।

औरंगजेब: सच्चाई और गल्प (Hindi Overview)